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1096 विद्यालयों से उठी जल संरक्षण की अलख, भूजल सप्ताह बना जनआंदोलन: बीएसए

बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा बोले— "बचेगा जल तो सजेगा कल", रैली, प्रभात फेरी, प्रतियोगिताओं और शपथ के जरिए विद्यार्थियों ने दिया जल बचाने का संदेश

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कौशाम्बी: उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर 16 से 22 जुलाई तक आयोजित सात दिवसीय 'भूजल सप्ताह' के समापन पर जनपद के सभी 1096 परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों ने जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया। विद्यालयों में प्रभात फेरियों, जागरूकता रैलियों, चित्रकला, निबंध, स्लोगन प्रतियोगिताओं और शपथ ग्रहण कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को जल संरक्षण का संदेश दिया गया।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने अभियान के समापन पर जारी अपने संदेश में कहा कि "बचेगा जल तो सजेगा कल, यही जीवन का अनुपम संबल" केवल एक नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने कहा कि धरती की गोद में लगातार घटता भूजल स्तर केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व से जुड़ी गंभीर चुनौती है। ऐसे समय में विद्यालयों की भूमिका समाज को जागरूक करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बीएसए ने बताया कि जनपद के सभी 1096 विद्यालयों में बच्चों ने प्रभात फेरियों और जागरूकता रैलियों के माध्यम से गांव-गांव और मोहल्लों तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाया। वहीं चित्रकला, निबंध, स्लोगन और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों ने वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जल के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने जल की प्रत्येक बूंद बचाने तथा वर्षा जल को धरती में संचित करने की शपथ ली। साथ ही अभिभावकों को भी घरों में सोख्ता गड्ढा (सोक पिट) बनाने, वर्षा जल संचयन अपनाने और जल के अपव्यय को रोकने के लिए प्रेरित किया गया।

डॉ. कुशवाहा ने अभियान की सफलता का श्रेय सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, एसआरजी, शिक्षक संकुल, एआरपी, प्रधानाध्यापकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा छात्र-छात्राओं को देते हुए कहा कि सभी ने शासन की मंशा को पूरी निष्ठा से जन-जन तक पहुंचाया और इसे एक प्रभावी जनजागरूकता अभियान में बदल दिया।

उन्होंने जनपदवासियों से आह्वान किया कि जल संरक्षण की यह चेतना केवल अभियान तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक परिवार की जीवनशैली का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि यदि आज जल को बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा और कौशांबी जल-समृद्ध, हरित एवं समृद्ध जनपद के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

बीएसए ने अंत में सभी से जल संरक्षण का संकल्प दोहराते हुए कहा, "जल ही जीवन का सार है, इसका संचयन सबसे बड़ा संस्कार है।"