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एफएलएन प्रशिक्षण में एसआरजी ओम प्रकाश सिंह ने शिक्षकों को बताए प्रभावी शिक्षण के गुर

गतिविधि आधारित व आनंदपूर्ण शिक्षण पर दिया जोर, बच्चों के दैनिक जीवन और परिवेश से सीखने की प्रक्रिया जोड़ने का किया आह्वान

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कौशाम्बी : विकासखंड सिराथू और कड़ा में चल रहे पांच दिवसीय एफएलएन प्रशिक्षण के दौरान सोमवार को स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) के सदस्य डा. ओम प्रकाश सिंह प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे। उन्होंने प्रशिक्षण सत्र का जायजा लेने के साथ ही शिक्षकों से संवाद किया और बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को प्रभावी ढंग से विकसित करने के लिए आवश्यक शिक्षण विधियों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों को प्रशिक्षण में बताई जा रही तकनीकों को कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक रूप से लागू करने के लिए प्रेरित किया।

एसआरजी डा. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है। एफएलएन का उद्देश्य केवल बच्चों को अक्षर और अंकों की पहचान कराना नहीं है, बल्कि उनमें समझ, तर्क, अभिव्यक्ति, समस्या समाधान और सीखने की जिज्ञासा विकसित करना भी है। इसके लिए कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी दबाव के खेल, गतिविधि, प्रयोग और अपने अनुभवों के माध्यम से सीख सकें।

उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के लिए गतिविधि आधारित और आनंदपूर्ण शिक्षण अधिक प्रभावी होता है। शिक्षक बच्चों की रुचि और क्षमता को ध्यान में रखते हुए शिक्षण गतिविधियों का चयन करें। बच्चों के दैनिक जीवन और आसपास के परिवेश को सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने पर वे विषय-वस्तु को आसानी से समझ और लंबे समय तक याद रख सकते हैं। घर, विद्यालय, आंगन, खेत, बाजार और प्रकृति से जुड़े अनुभवों को भी शिक्षण का माध्यम बनाया जा सकता है।

संदर्शिका व कार्यपुस्तिका के प्रयोग का कराया अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने एफएलएन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और शिक्षण विधियों का अभ्यास किया। संदर्शिका एवं कार्यपुस्तिका के प्रभावी प्रयोग पर विशेष चर्चा की गई। ‘वीणा’ के माध्यम से भाषा शिक्षण को रोचक और सहज बनाने, ‘गणित मेला’ के जरिए खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को समझाने तथा ‘संतूर’ और ‘हमारा अद्भुत संसार’ के माध्यम से बच्चों को उनके आसपास के परिवेश, प्रकृति और दैनिक अनुभवों से जोड़ने के तरीकों पर शिक्षकों ने अभ्यास किया।

डा. सिंह ने कहा कि जब सीखना बच्चों के लिए आनंद का विषय बन जाता है तो उनकी सहभागिता और समझ दोनों बेहतर होती हैं। इसलिए शिक्षकों को चाहिए कि वे गणित को गतिविधियों और खेलों से, भाषा को कहानियों व संवाद से, तर्क को खेलों और प्रयोगों से तथा विज्ञान को आसपास के परिवेश से जोड़कर पढ़ाएं। इससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि पैदा होने के साथ-साथ उनकी बुनियादी क्षमताओं का भी बेहतर विकास होगा।

बच्चों को सीखने के लिए दें पर्याप्त अवसर

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में केवल शिक्षक बोलने वाला और बच्चे सुनने वाले न रहें। बच्चों को प्रश्न पूछने, अपनी बात कहने, प्रयोग करने, चर्चा करने और स्वयं गतिविधियों में भाग लेने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसलिए शिक्षक बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए प्रश्न, संवाद, प्रयोग और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने-सिखाने की विधियों का अभ्यास किया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एफएलएन के लक्ष्यों के अनुरूप कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी, रुचिकर और बाल-केंद्रित बनाने के लिए तैयार करना रहा।