कौशाम्बी : जनपद में निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के उद्देश्य से गुरुवार को डायट प्राचार्य निधि शुक्ला के मार्गदर्शन में विकासखंड मंझनपुर, नेवादा, मूरतगंज एवं सरसवां के शिक्षक संकुलों की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई गति देने, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने, पठन संस्कृति विकसित करने, डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सतत सुधार के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों ने शिक्षक संकुलों को विद्यालयों के शैक्षणिक नेतृत्व की मजबूत कड़ी बताते हुए उन्हें मिशन की सफलता का प्रमुख आधार बताया।
बैठक में निपुण भारत मिशन मॉनिटरिंग सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर विद्यालयवार शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा की गई। शिक्षक संकुलों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित रूप से विद्यालयों का शैक्षणिक अनुश्रवण करें, बच्चों के सीखने के स्तर का निरंतर मूल्यांकन करें तथा प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाने के लिए निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार कार्य सुनिश्चित करें। साथ ही विद्यालयों में सीखने का वातावरण अधिक प्रेरणादायी, आनंददायक एवं बाल-केंद्रित बनाने पर विशेष बल दिया गया।
एलएलएफ टीम की जिला समन्वयक आरती वर्मा ने शिक्षक संदर्शिका के प्रभावी उपयोग तथा साप्ताहिक कार्ययोजना के व्यवस्थित क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संदर्शिका का नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग कक्षागत शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और परिणामकारी बनाता है। वहीं डायट प्रवक्ता धीरज कुमार ने सक्रिय वालवाटिका एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीसीई) की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए विद्यालयों में बच्चों के लिए आनंददायक शिक्षण वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
एसआरजी डॉ. दिलीप कुमार तिवारी ने कैच-अप कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा विद्यालयों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए पुस्तकालयों एवं रीडिंग कॉर्नर के नियमित उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित किए बिना निपुण भारत मिशन के लक्ष्य पूरी तरह प्राप्त नहीं किए जा सकते। वरिष्ठ प्रवक्ता अनूप कुमार गुप्ता ने शिक्षक संकुलों से नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने, टीएलएम का अधिकाधिक उपयोग करने, निपुण तालिका का नियमित अद्यतन करने तथा कार्यपुस्तिकाओं की समयबद्ध जांच कर विद्यार्थियों को रचनात्मक फीडबैक देने का आह्वान किया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि शिक्षक संकुल शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके सक्रिय सहयोग से विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देशों एवं शैक्षणिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी शिक्षक संकुलों से एक सप्ताह के भीतर खराब टैबलेटों की सूची उपलब्ध कराने को कहा, ताकि उन्हें शीघ्र ठीक कर डिजिटल शिक्षण गतिविधियों को और गति दी जा सके।
उन्होंने शिक्षक संकुलों से जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति (एनएमएमएस) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की बेहतर तैयारी कराने, पात्र छात्रों के आवेदन समय से भरवाने तथा उत्कृष्ट शिक्षकों के नवाचारों का व्यवस्थित प्रलेखन कर उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के शिक्षक पुरस्कारों के लिए अधिकाधिक नामित करने का भी आह्वान किया।
बैठक में छात्र उपस्थिति बढ़ाने, अभिभावकों की सहभागिता मजबूत करने, सीखने के स्तर का नियमित मूल्यांकन करने तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और आनंददायक शिक्षा पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। अंत में शिक्षक संकुलों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने विद्यालयों में निर्धारित कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
बैठक में डायट मेंटर डॉ. देवेंद्र सिंह यादव, राजेंद्र कुमार भारतीय, डॉ. देवेंद्र कुमार मिश्र, डॉ. संदीप तिवारी, धीरज कुमार, सुरेश कुमार मिश्र, डॉ. नरेंद्र कुमार सहित चारों विकासखंडों के शिक्षक संकुल उपस्थित रहे।
