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सांप-सीढ़ी के खेल से गणित में दक्ष हो रहे नौनिहाल

खेल-खेल में अंकों की पहचान से लेकर जोड़-घटाव और आरोही-अवरोही क्रम का कर रहे अभ्यास

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कौशाम्बी :बच्चों के लिए गणित जैसे विषय को सरल, सहज और रुचिकर बनाने के लिए कड़ा के प्राथमिक विद्यालय हिसामपुर परसखी में गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यालय में बच्चों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय खेल और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रधानाध्यक रामकृष्ण साहू व शिक्षिका रिया सेठी ने बच्चों को सांप-सीढ़ी का खेल खिलाकर गणित के प्रति उनकी समझ को मजबूत किया।

सांप-सीढ़ी के खेल के दौरान बच्चों ने एक से दूसरे अंक तक पहुंचने, अंकों की पहचान करने व उनके क्रम को समझने का अभ्यास किया। इसके साथ ही बच्चों को आरोही और अवरोही क्रम, जोड़-घटाव और संख्या ज्ञान से जुड़ी विभिन्न अवधारणाओं को भी खेल के माध्यम से समझाया गया। खेल में जब बच्चों को पासा फेंककर आगे बढ़ना होता था, तो वे प्राप्त अंक के अनुसार गिनती करते हुए अपनी स्थिति निर्धारित करते थे। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें गणितीय गणनाओं का स्वाभाविक रूप से अभ्यास करने का अवसर मिला।

खेल के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। अपनी बारी का इंतजार करने के साथ बच्चे दूसरे साथियों की गतिविधियों को भी ध्यान से देखते रहे। सही उत्तर देने और खेल में आगे बढ़ने की होड़ ने बच्चों में सीखने की उत्सुकता बढ़ाई। जहां एक ओर बच्चे सांप और सीढ़ी के माध्यम से खेल का आनंद ले रहे थे, वहीं दूसरी ओर उन्हें पता ही नहीं चला कि इसी दौरान वे गणित के कई महत्वपूर्ण कौशलों का अभ्यास कर रहे हैं।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि बच्चों की खेलों में स्वाभाविक रुचि होती है। यदि इसी रुचि को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ दिया जाए तो कठिन से कठिन विषय को भी बच्चों के लिए सरल बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से विद्यालय में गतिविधि आधारित शिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। खेल के माध्यम से पढ़ाई कराने पर बच्चे पूरे मनोयोग से गतिविधि में शामिल होते हैं और उन्हें सीखने का बेहतर अवसर मिलता है।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में केवल विषयगत दक्षता ही नहीं बढ़ती, बल्कि उनमें आपसी सहयोग, सहभागिता, अनुशासन, निर्णय लेने और अपनी बारी का इंतजार करने जैसे गुणों का भी विकास होता है। बच्चे एक-दूसरे को देखकर सीखते और प्रेरित करते हैं, जिससे कक्षा का वातावरण भी आनंदपूर्ण बना रहता है।

प्रधानाध्यापक ने कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बच्चे पढ़ाई को बोझ नहीं समझते। खेल-खेल में सीखने से उनकी विद्यालय आने में रुचि बनी रहती है और नियमित उपस्थिति को भी बढ़ावा मिलता है। सांप-सीढ़ी जैसे सरल खेलों को गणितीय अवधारणाओं से जोड़कर बच्चों में संख्या ज्ञान और गणितीय दक्षता विकसित करने का यह प्रयास विद्यालय में सीखने को और प्रभावी बना रहा है।