कौशांबी : बच्चों में पठन कौशल विकसित करने और उन्हें नियमित पढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से नेवादा विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय पेरई में अभिनव पहल की जा रही है। विद्यालय में प्रतिदिन बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने का अवसर दिया जाता है। बच्चे रुचि के साथ समाचार पत्र की खबरें पढ़ते हैं और इसके बाद उनमें लिखी गई बातों को समझने का प्रयास करते हैं। इस गतिविधि से विद्यार्थियों में पढ़ने के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनकी एकाग्रता, तार्किक सोच, शब्द-भंडार, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति कौशल भी विकसित हो रहा है।
राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक हरिओम सिंह की इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका है। वह बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करते हैं और उनके साथ खबरों को लेकर संवाद करते हैं। बच्चे समाचार पढ़ने के बाद उसमें आए नए शब्दों का अर्थ समझते हैं तथा महत्वपूर्ण बातों को अपने शब्दों में बताने का प्रयास करते हैं। इससे उनमें सुनने, समझने, बोलने और पढ़ने के कौशल में सुधार देखने को मिल रहा है।
समाचार पत्र वाचन के दौरान बच्चों को अलग-अलग विषयों की खबरों से परिचित कराया जाता है। स्थानीय घटनाओं के साथ देश-दुनिया, खेल, विज्ञान, पर्यावरण और शिक्षा से जुड़ी खबरें पढ़कर बच्चे अपने आसपास की घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने लगे हैं। किसी खबर को पढ़ने के बाद बच्चों से सवाल पूछे जाते हैं, जिससे वे केवल खबर पढ़ने तक सीमित न रहकर उसके कारण और प्रभाव पर भी विचार करते हैं। इससे उनमें प्रश्न पूछने और तर्क के आधार पर अपनी बात रखने की क्षमता विकसित हो रही है।
इस गतिविधि का असर बच्चों के लेखन कौशल पर भी दिखाई दे रहा है। समाचार पत्र पढ़ने के बाद बच्चे महत्वपूर्ण बिंदुओं को लिखने, छोटी खबर या अपने विचार लिखने का अभ्यास करते हैं। नए शब्दों और वाक्य विन्यास से परिचित होने के कारण उनके शब्द-भंडार में भी वृद्धि हो रही है। बच्चे अपने विचारों को पहले की अपेक्षा अधिक सहजता और स्पष्टता के साथ व्यक्त कर पा रहे हैं।
शिक्षक हरिओम सिंह बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित करने के साथ उनकी जिज्ञासाओं को भी प्रोत्साहित करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि बच्चे किसी भी खबर को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उसे समझें, उस पर विचार करें और अपनी प्रतिक्रिया भी दें। विद्यालय की यह पहल बच्चों में पढ़ने की नियमित आदत विकसित करने के साथ उन्हें जागरूक, जिज्ञासु और तार्किक सोच रखने वाला विद्यार्थी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
