कौशाम्बी: समायोजित शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ दिलाने की मांग अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद तक पहुंच गई है। गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक खंड से विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने नियम-115 के तहत यह मुद्दा सदन में उठाते हुए सरकार से शेष जनपदों में भी समायोजित शिक्षकों से विकल्प पत्र लेकर उन्हें पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित करने की मांग की। इस पर विधान परिषद की पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार को आवश्यक एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त समायोजित शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह व प्रांतीय कोषाध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने 19 जुलाई 2026 को एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह को पत्र सौंपकर इस विषय को सदन में उठाने का अनुरोध किया था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि 28 जून 2024 के शासनादेश के अनुसार 28 मार्च 2005 से पूर्व विज्ञापित पदों के सापेक्ष चयनित अध्यापकों को उत्तर प्रदेश रिटायरमेंट बेनिफिट्स रूल्स-1961 के अंतर्गत पुरानी पेंशन का विकल्प दिया जाना चाहिए। साथ ही नियमों के अनुरूप पूर्व सेवा अवधि को भी पेंशन निर्धारण में शामिल किया जाना आवश्यक है।
इस मांग को गंभीरता से लेते हुए एमएलसी ने 5 अगस्त 2026 को प्रमुख सचिव, विधान परिषद के समक्ष नियम-115 के अंतर्गत सूचना प्रस्तुत की। सूचना में बताया गया कि प्रदेश के 47 जनपदों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा समायोजित शिक्षकों से विकल्प पत्र प्राप्त कर आगे की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 28 जनपदों में अभी तक विकल्प पत्र नहीं लिए गए हैं। इसके कारण हजारों समायोजित शिक्षकों की जीपीएफ कटौती प्रारंभ नहीं हो सकी है और वे पुरानी पेंशन के लाभ से वंचित हैं। इस पर पीठ ने सरकार को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विधान परिषद में मामला उठाए जाने पर समायोजित शिक्षक संघ कौशांबी के जिला अध्यक्ष एवं प्रयागराज मंडल अध्यक्ष रमेश चंद्र सेन ने एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह समायोजित शिक्षकों के लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्हें विश्वास है कि सरकार पीठ के निर्देशों का सम्मान करते हुए शेष 28 जनपदों में भी शीघ्र विकल्प पत्र लेने की प्रक्रिया पूरी कर समायोजित शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इससे हजारों शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है।
