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सपोर्टिव सुपरविजन के तहत कस्तूरबा विद्यालय में परखी गई शैक्षिक गुणवत्ता

एआरपी कृष्ण प्रकाश सिंह ने कैच-अप शिक्षण, निपुण तालिका, स्मार्ट क्लास व गतिविधि आधारित शिक्षण का किया अवलोकन, शिक्षिकाओं को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

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कौशाम्बी: जिले के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और शासन की प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के उद्देश्य से बुधवार को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, कौशाम्बी में सपोर्टिव सुपरविजन किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा एवं खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार सिंह के निर्देश पर आयोजित इस निरीक्षण में एआरपी कृष्ण प्रकाश सिंह ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों का गहन अवलोकन किया और शिक्षिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

सपोर्टिव सुपरविजन के दौरान एआरपी ने कैच-अप शिक्षण कार्यक्रम, निपुण तालिका, नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के प्रभावी उपयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण, पुस्तकालय के नियमित संचालन, कार्यपुस्तिका के उपयोग, शिक्षक डायरी के संधारण, स्मार्ट क्लास के संचालन तथा बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक बिंदु पर शिक्षिकाओं से चर्चा कर विद्यालय में इन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के सुझाव दिए।

एआरपी कृष्ण प्रकाश सिंह ने कहा कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कक्षा शिक्षण को बच्चों की सीखने की गति और आवश्यकता के अनुरूप बनाना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षिकाओं से आह्वान किया कि वे गतिविधि आधारित शिक्षण, समूह कार्य, संवादात्मक कक्षाओं और नवीन शिक्षण तकनीकों का अधिकाधिक प्रयोग करें, ताकि प्रत्येक छात्रा की अधिगम क्षमता में अपेक्षित सुधार हो सके।

निरीक्षण के दौरान विद्यालय की शैक्षिक एवं अकादमिक व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया। पुस्तकालय के नियमित उपयोग, स्मार्ट क्लास के माध्यम से डिजिटल शिक्षण तथा कार्यपुस्तिका के प्रभावी प्रयोग पर विशेष जोर देते हुए एआरपी ने कहा कि इन संसाधनों का समुचित उपयोग बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अंत में उन्होंने विद्यालय की शिक्षिकाओं को बच्चों की शत-प्रतिशत अधिगम उपलब्धि सुनिश्चित करने, कक्षा शिक्षण को रोचक, आनंददायक एवं सहभागी बनाने तथा शासन की सभी शैक्षिक पहलों को पूरी गुणवत्ता के साथ लागू करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारात्मक सुझाव देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति सतत प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।