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वीणा की गूंज और गणित मेला के जादू से निपुण बनेंगे कौशांबी के नौनिहाल, प्राथमिक शिक्षा की बदलेगी सूरत

डायट मंझनपुर में ब्लॉक संदर्भदाताओं का पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, एफएलएन और नई एनसीईआरटी पुस्तकों के प्रभावी क्रियान्वयन पर होगा विशेष फोकस

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कौशाम्बी: परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देने और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) मंझनपुर में पांच दिवसीय ब्लॉक संदर्भदाता प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। राज्य परियोजना कार्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आयोजित प्रशिक्षण का संचालन उप शिक्षा निदेशक व डायट प्राचार्य निधि शुक्ला के निर्देशन व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में किया जा रहा है। प्रशिक्षण में जनपद के सभी विकासखंडों के अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) व लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) की टीम प्रतिभाग कर रही है।

प्रशिक्षण के पहले दिन मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से प्राप्त करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बच्चों में भाषा एवं गणित की बुनियादी दक्षता विकसित करना प्राथमिक शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, सहभागितापूर्ण कक्षा संचालन व नवाचारों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया।

सत्र के दौरान कक्षा चार की नई हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' व गणित की पुस्तक 'गणित मेला' की विषयवस्तु, शिक्षण तकनीक और कक्षा में उनके प्रभावी उपयोग पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि नई पुस्तकों का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, भाषा कौशल और तार्किक क्षमता का विकास करना है। गणित मेला के माध्यम से बच्चे खेल-खेल में कठिन अवधारणाओं को सरलता से समझ सकेंगे, जबकि 'वीणा' भाषा सीखने को अधिक रोचक और जीवन से जोड़ने का कार्य करेगी।

प्रशिक्षण में कोरोना काल अथवा अन्य कारणों से बच्चों की पढ़ाई में आई कमी को दूर करने के लिए कैच-अप शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि बालवाटिका से लेकर कक्षा पांच तक प्रत्येक बच्चे का सतत आकलन कर उसकी सीखने की आवश्यकता के अनुसार शिक्षण कार्य किया जाए, ताकि सभी बच्चे निर्धारित समय सीमा के भीतर निपुण लक्ष्य प्राप्त कर सकें।

इस दौरान स्मार्ट क्लास, शिक्षक डायरी, निपुण तालिका, कार्यपुस्तिका व अन्य शिक्षण-अधिगम सामग्री के प्रभावी उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने कहा कि आधुनिक तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षण के समन्वय से कक्षा शिक्षण अधिक प्रभावी और बच्चों के लिए रुचिकर बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षण में विद्यालयी पुस्तकालयों के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकें अलमारियों में बंद रखने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के हाथों तक पहुंचाने के लिए होती हैं। यदि बच्चों में नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित होगी तो उनकी भाषा क्षमता, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति स्वतः बेहतर होगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में पठन संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया गया।

मुख्य संदर्भदाताओं ने शिक्षकों से अपील की कि वे रटने की पारंपरिक पद्धति को छोड़कर गतिविधि आधारित, बाल केंद्रित व नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को अपनाएं। साथ ही विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां प्रत्येक बच्चा सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा सके।

प्रशिक्षण में मुख्य संदर्भदाता के रूप में डॉ. संदीप तिवारी, डॉ. देवेंद्र मिश्रा, डॉ. दिलीप तिवारी व डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने विभिन्न विषयों पर तकनीकी व व्यावहारिक जानकारी साझा की। पांच दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में संदर्भदाताओं को नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों, एफएलएन, कक्षा शिक्षण, मूल्यांकन, गतिविधि आधारित अधिगम तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद यही प्रशिक्षित संदर्भदाता अपने-अपने विकासखंडों में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे जनपद के परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और अधिक मजबूती मिल सके।